अगस्त 2026 में टाटा पंच 21,320 यूनिट्स के साथ भारत की सबसे ज्यादा बिकने वाली सब-4 मीटर एसयूवी रही। इस संख्या में पंच के ICE और इलेक्ट्रिक मॉडल शामिल हैं। मारुति फ्रॉन्क्स दूसरे और टाटा नेक्सॉन तीसरे स्थान पर रहीं। बिक्री रिपोर्ट
छोटी SUV की बिक्री में टाटा पंच आगे, अगस्त में लगभग दोगुना हुआ आंकड़ा
भारत में चार मीटर से छोटी एसयूवी की बिक्री अगस्त 2026 में बढ़ी। सेगमेंट की कुल बिक्री 1,21,391 यूनिट्स रही, जो सालाना आधार पर 40.88% अधिक है। टाटा पंच ने इस श्रेणी में पहला स्थान हासिल किया। नवभारत टाइम्स
अगस्त में सबसे ज्यादा बिकने वाली 10 छोटी एसयूवी
| स्थान | मॉडल | बिक्री: अगस्त 2026 |
|---|---|---|
| 1 | टाटा पंच और पंच EV | 21,320 |
| 2 | मारुति सुजुकी फ्रॉन्क्स | 18,730 |
| 3 | टाटा नेक्सॉन और नेक्सॉन EV | 18,431 |
| 4 | मारुति सुजुकी ब्रेजा | 15,288 |
| 5 | हुंडई वेन्यू | 11,365 |
| 6 | किआ सोनेट | 9,048 |
| 7 | महिंद्रा XUV 3XO और EV | 8,302 |
| 8 | हुंडई एक्सटर | 8,157 |
| 9 | स्कोडा कायलाक | 3,590 |
| 10 | टोयोटा टाइजर | 2,863 |
सभी आंकड़े यूनिट्स में हैं। मॉडलवार विवरण: नवभारत टाइम्स की बिक्री सूची।
पंच की बिक्री में कितना बदलाव आया?
अगस्त 2025 में पंच की बिक्री 10,704 यूनिट्स थी। इस बार इसमें 99.18% वृद्धि दर्ज हुई। रिपोर्ट में पंच की हिस्सेदारी 17.56% बताई गई है। ध्यान रहे, यह हिस्सेदारी सब-4 मीटर एसयूवी श्रेणी की है, पूरे भारतीय कार बाजार की नहीं। पंच की बिक्री का विवरण
बिक्री बढ़ने के पीछे बाजार की क्या स्थिति रही?
अगस्त के व्यापक ऑटो बाजार में कंपनियों से डीलरों को होने वाली बिक्री में भी सालाना बढ़ोतरी देखने को मिली। रॉयटर्स के अनुसार, त्योहारों से पहले मांग और पिछले साल का कम आधार इसके सहायक कारण रहे। अगस्त 2025 में टैक्स कटौती की उम्मीद के चलते कुछ ग्राहकों ने खरीद टाली थी, जिससे इस वर्ष की सालाना तुलना को फायदा मिला। रॉयटर्स की बाजार रिपोर्ट
हालांकि, पूरे बाजार में वृद्धि के कारणों को किसी एक मॉडल की सफलता का निश्चित कारण नहीं माना जा सकता। यह जानने के लिए कि ग्राहकों ने खासतौर पर पंच क्यों चुनी, अलग ग्राहक सर्वेक्षण या कंपनी का विस्तृत विश्लेषण जरूरी होगा।
इन आंकड़ों को कैसे समझें?
एक महीने की बिक्री से बाजार में मॉडल की स्थिति का पता चलता है। लेकिन कार खरीदने का फैसला सिर्फ रैंकिंग देखकर नहीं करना चाहिए। अपनी जरूरत के अनुसार केबिन स्पेस, इस्तेमाल का खर्च, सर्विस की उपलब्धता और चुने गए वेरिएंट के फीचर्स की तुलना करें।
साथ ही, कंपनी से डीलर को भेजी गई गाड़ियों और ग्राहकों के नाम हुए रजिस्ट्रेशन के आंकड़े अलग होते हैं। किसी बिक्री रिपोर्ट की तुलना करते समय अवधि और आंकड़ों का आधार समान रखना जरूरी है।